RRB GROUP D Expected CUTOFF 2026
RRB Group D Cutoff 2026: आंसर की के बाद कितनी जा सकती है कटऑफ? जानिए सटीक विश्लेषण
RRB Group D Exam 2026 की परीक्षा सफलतापूर्वक 10 फरवरी को समाप्त हो चुकी है। परीक्षा खत्म होने के बाद से ही परीक्षार्थियों की धड़कनें तेज थीं और ठीक एक हफ्ते बाद यानी 17 फरवरी को रेलवे भर्ती बोर्ड ने आंसर की (Answer Key) भी जारी कर दी है। अब जब छात्रों ने अपने सही और गलत उत्तरों का मिलान कर लिया है, तो सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक बस एक ही सबसे बड़ा सवाल तैर रहा है— “आखिर कटऑफ कितनी जाएगी?”
आइए, आज के इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि इस बार के समीकरण क्या कह रहे हैं और किन कारकों (factors) पर आपकी सफलता टिकी है।
रॉ मार्क्स (Raw Marks) बनाम नॉर्मलाइजेशन: असली खेल अभी बाकी है
सबसे पहले तो हमें यह समझना होगा कि अभी आपने आंसर की चेक करने के बाद जो अंक जोड़े हैं, वे आपके ‘रॉ मार्क्स’ (Raw Marks) हैं। अक्सर छात्र यहीं पर गलती कर बैठते हैं और अपने मौजूदा स्कोर को ही अंतिम परिणाम मान लेते हैं। रेलवे की परीक्षाओं में ‘नॉर्मलाइजेशन’ (Normalisation) एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
चूँकि परीक्षा कई दिनों तक और अलग-अलग शिफ्टों में चलती है, इसलिए किसी शिफ्ट का पेपर कठिन होता है तो किसी का थोड़ा सरल। इस अंतर को बराबर करने के लिए रेलवे एक विशेष फॉर्मूले का इस्तेमाल करता है।
- नंबर बढ़ सकते हैं: अगर आपकी शिफ्ट कठिन थी, तो आपके 5 से 10 नंबर तक बढ़ सकते हैं।
- नंबर स्थिर रह सकते हैं: अगर पेपर का स्तर औसत था, तो अंकों में बहुत मामूली बदलाव होगा।
इसलिए, यदि आपके नंबर उम्मीद से थोड़े कम रह गए हैं, तो निराश न हों; नॉर्मलाइजेशन का जादू अभी चलना बाकी है।
कटऑफ को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
कटऑफ कभी भी हवा में तय नहीं होती। इसके पीछे कई ठोस कारण होते हैं: - पदों की संख्या: जिस ज़ोन में रिक्तियाँ (Vacancies) अधिक होती हैं, वहां कटऑफ अक्सर थोड़ी कम रहने की उम्मीद होती है।
- उपस्थिति (Attendance): इस बार देखा गया है कि कई केंद्रों पर छात्रों की उपस्थिति 50-60% के आसपास ही रही है। कम कंपटीशन का सीधा फायदा कटऑफ गिरने के रूप में मिलता है।
- पेपर का स्तर: पिछले साल की तुलना में इस बार विज्ञान और तर्कशक्ति (Reasoning) के सवालों ने छात्रों को थोड़ा उलझाया है।
- ज़ोन वाइज अंतर: इलाहाबाद, जयपुर और पटना जैसे डेंजर ज़ोन की कटऑफ हमेशा गुवाहाटी या चेन्नई जैसे ज़ोन से अधिक रहती है।
अपेक्षित कटऑफ (Expected Cutoff) 2026: एक अनुमानित विश्लेषण
विभिन्न कोचिंग संस्थानों के डेटा, छात्रों के फीडबैक और पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को खंगालने के बाद, हमने एक औसत कटऑफ (Average Cutoff) तैयार की है। यदि आपके रॉ मार्क्स इस रेंज में बन रहे हैं, तो आप खुद को सुरक्षित जोन में मान सकते हैं।
श्रेणीवार संभावित कटऑफ तालिका
श्रेणी (Category) अपेक्षित कटऑफ (Expected Cutoff)
सामान्य (General) 70 – 80
ओबीसी (OBC – NCL) 65 – 75
ईडब्ल्यूएस (EWS) 60 – 70
अनुसूचित जाति (SC) 55 – 65
अनुसूचित जनजाति (ST) 45 – 55 नोट: यह एक संभावित अनुमान है। हर ज़ोन की कटऑफ में 2-4 नंबर का उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।क्या आपको PET (शारीरिक दक्षता परीक्षा) की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए?
अक्सर छात्र रिजल्ट का इंतज़ार करने में इतना समय बर्बाद कर देते हैं कि उन्हें फिजिकल की तैयारी का मौका ही नहीं मिलता। रेलवे ग्रुप डी में केवल लिखित परीक्षा पास करना काफी नहीं है, आपको शारीरिक रूप से भी खुद को साबित करना होगा।
अगर आप General कैटेगरी में हैं और आपके रॉ मार्क्स 65+ बन रहे हैं, या आप SC/ST कैटेगरी से हैं और आपके मार्क्स 50 के आसपास हैं, तो आपको आज से ही दौड़ शुरू कर देनी चाहिए। याद रखिए, नॉर्मलाइजेशन के बाद आपका स्कोर उछाल मार सकता है, और उस समय आपके पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा यदि आपकी फिजिकल तैयारी अधूरी रही।
ज़ोन का गणित: कहाँ रहेगी कम और कहाँ ज़्यादा?
जैसा कि हमने पहले चर्चा की, कटऑफ ज़ोन पर बहुत निर्भर करती है।- हाई कटऑफ ज़ोन: चंडीगढ़, रांची, इलाहाबाद और कोलकाता। यहाँ छात्रों की संख्या और कंपटीशन का स्तर काफी ऊंचा रहता है।
- लो कटऑफ ज़ोन: वेस्टर्न रेलवे (मुंबई), चेन्नई, हुबली और गुवाहाटी। इन क्षेत्रों में अक्सर देखा गया है कि कटऑफ औसत से थोड़ी नीचे रहती है।
इसलिए, कटऑफ देखते समय अपने ज़ोन की पुरानी हिस्ट्री को भी ध्यान में रखें।
निष्कर्ष: धैर्य रखें और सकारात्मक रहें
RRB Group D की यह यात्रा आसान नहीं रही है। वर्षों का इंतज़ार और फिर कड़ी मेहनत के बाद आपने परीक्षा दी है। आंसर की आने के बाद मन में उथल-पुथल होना स्वाभाविक है, लेकिन याद रखें कि एक परीक्षा आपकी काबिलियत का अंतिम पैमाना नहीं है।
फिलहाल, अगर आपके नंबर ऊपर दी गई रेंज में आ रहे हैं, तो बिना समय गंवाए अगले चरण की तैयारी में जुट जाएं। और अगर नंबर थोड़े कम भी हैं, तो भी हिम्मत न हारें, क्योंकि नॉर्मलाइजेशन का परिणाम अक्सर चौंकाने वाला होता है।
आपकी राय क्या है?
आपके ज़ोन से आपके कितने रॉ मार्क्स बन रहे हैं? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं ताकि हम एक और सटीक डेटा विश्लेषण तैयार कर सकें।
ऐसी ही सटीक जानकारी और जॉब अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।